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  1. गजल

    Monday, April 23, 2018

    तोरा बिना चान ताराक की मोल
    रंगीन संसार साराक की मोल

    अन्हारमे जे हमर संग नै भेल
    दिन दूपहरिया सहाराक की मोल

    चुप्पीक गम्भीरता बुझि चलल खेल
    लग ओकरा छै इशाराक की मोल

    संवेदना सोचमे छै जकर शुन्य
    नोरक बहल कोन धाराक की मोल

    अपने बना गेल हमरा जखन आन
    कुन्दन कहू ई विचाराक की मोल

    221-221-221-221

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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