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  1. गजल

    Saturday, June 20, 2020

    कांटक ढेरीमे फूल खोजि रहल छी
    संकटमे हर्षक मूल खोजि रहल छी

    मौलाबै नै कतबो अकाल समयमे
    जीवनमे से अडहूल खोजि रहल छी

    कुर्सी अजबारल कोढियासँ अनेरो
    नेता देशक काजूल खोजि रहल छी

    लाखो छै कारण टूटबाक मनुषमे
    सभकें जोडै से पूल खोजि रहल छी

    इच्छा आकांक्षा लोभ मोहसँ कुन्दन
    अपने बन्हनके शूल खोजि रहल छी

    222-22-2121-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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