Rss Feed
  1. गजल

    Saturday, June 20, 2020

    स्वर्ग हो या नर्क संगमे रहब
    प्रेममे जियबाक ढंगमे रहब

    लाख टुकड़ी करि शरीर देख लिअ
    बस अहीं टा अंग अंगमे रहब

    लाल पीयर आब कोन काजकें
    हम तँ सजनी केर रंगमे रहब

    आशमे जिनगी बिता रहल छलौं
    सांस मिलिते देर दंगमे रहब

    मानि कुन्दनकें बताह ले मुदा
    चाहमे ककरो उमंगमे रहब

    212-221-212-12

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    | |


  2. 0 comments:

    Post a Comment