Rss Feed
  1. गजल

    Saturday, June 20, 2020

    जे अछि हियामे सब सुनाबू आइ
    दर्दक दवाई छै बताबू आइ

    आबू करू किछु आत्मबोधक बात
    संसार सूतल छै जगाबू आइ

    दुख भेल बर सुख भेल कनियाँ बूझि
    दुन्नू मिला जिनगी सजाबू आइ

    प्रेमी हजारौ प्रेम बिनु तडपैत
    टूटल हिया सभकें जुटाबू आइ

    नैनक करूणा मोन लेलक मोहि
    अपना हिया हमरा बसाबू आइ

    धरती कहीं नर्के जकाँ बनि जाइ
    वातावरण कुन्दन बचाबू आइ

    बहरे रजज मुसद्दस महज़ूफ

    © कुन्दन कुमार कर्ण

  2. 0 comments:

    Post a Comment