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  1. समुच्चा नगरमे मचल छै शोर
    भोलाकें बसहा लऽ गेलै चोर

    शुभम नै जानल स्कंद नै बूझल
    गौरी चकित भेलनि भोरे भोर
    भोलाकें बसहा...................

    ॠषि मुनि देवता चलल खोजीमे
    ककरो नै भेटल टूटलो डोर
    भोलाकें बसहा...................

    भागि चोर लगसँ कैलाश एलै
    बसहाकें भक्ति सेहो बेजोड़
    भोलाकें बसहा...................

    समुच्चा नगरमे मचल छै शोर
    कैलाश पर बरलै फेर इजोर
    गीत‌ बाजै छै जेना मटिकोर
    बसहा संग नाचै चिरै चकोर

    222222222

    © कुन्दन कुमार कर्ण

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