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  1. हजल

    Wednesday, July 29, 2020

    जकरा बुते उठल नै खर
    कहत बनेलौं नवका घर

    एक दिन बर जोतलनि हर
    हगलनि‌ पदलनि लगलनि जर

    घिनमाघिन चललै सबतरि
    हम छियै उपर तूँ छी तर

    मौगी खातिर रूसल छौड़ा
    नोकरी चाकरी ठां नै ठर

    साँच किए बजलियै अहाँ
    मनुष छियै की मनुषक झर

    22-22-22-2

    © कुन्दन कुमार कर्ण

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