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  1. गजल

    Monday, February 22, 2021

    ई दुनियाँ ककरो नै छियै
    जे रचलक तकरो नै छियै

    फँसि गेलै अपने जालमे
    प्राणी ओ मकरो नै छियै

    सुनिते खन नै आबै मजा
    फकरा से फकरो नै छियै

    सिंहासन चाही ओकरो
    जनता सब जकरो नै छियै

    तलवारक बल पर छै पकड़
    कलमक सन पकड़ो नै छियै

    222-222-12

    © कुन्दन कुमार कर्ण

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