मैथिली गजल प्रबर्धनके लेल 28 डिसेम्बर 2025 सँ 'मैथिली गजल पाठशाला' शुरू कएल गेल अछि । वाट्स ऐपपर शुरू भेल एहि पाठशालासँ मैथिली गजलमे नव गजलकार सभक प्रवेश हेतै से विश्वास लेल गेल अछि । पाठशालामे अभ्यर्थी सभक संख्या उत्साहजनक रूपमे निरन्तर बढि रहल छै । एखन धरि ६० सँ बेसी अभ्यर्थी सब सकृयतापूर्वक अभ्यास कऽ रहल छथि । पाठशालामे सहजकर्ताक रूपमे प्रशिक्षण कार्यमे आशीष अनचिनहार, कुन्दन कुमार कर्ण आ अभिलाष ठाकुर उल्लेखनीय काज कऽ रहल छथि । गजलमे नव आगन्तु सभक लेल मैथिली गजल नि:शुल्क सिखबाक सुअवसर अछि ई पाठशाला । पाठशालामे प्रत्येक दिन क्रमबद्ध तरिकासँ अभ्यास भऽ रहल छै आ अभ्यर्थी सभके प्रशिक्षक सभद्वारा प्रभावकारी पृष्ठपोषण प्रदान कएल जा रहल छै । जँ मैथिली गजल सिखबामे अहूँके रुची अछि त निच्चा देल QR स्कैन करि वा लिंकपर जा कऽ पाठशालामे सहभागी भऽ सकै छी । QR लिंक एहिपर क्लीक करि 'मैथिली गजल पाठशाला'सँ जुटू
'सूर्यास्तसँ पहिने'(सूर्यास्त भन्दा पहिले) यो नाम हो डा.राजेन्द्र विमल जीको गजल संग्रहको । यो संग्रहको भूमिकाको अन्तिम भागमा विमल जी लेख्नु हुन्छ "यो मैथिली भाषाको पहिलो यस्तो गजल संग्रह हो जसमा १००(एक सय) गजल प्रस्तुत गरिएको छ ।" जबकी, मैले जाने सम्म सन् १९८५ मा प्रकाशित गजल संग्रह 'लेखनी एक रंग अनेक' जुन कि रवीन्द्रनाथ ठाकुरको हो जसमा कुल १०९(एक सय नौ) वटा गजल संगसंगै कता समेत समावेश गरिएको छ । तब विमल जीको यो 'पहिलो' जस्तो घोषणाको अर्थ के? यो हुन सक्छ की विमल जी यसलाई नेपालीय मैथिलीको सन्दर्भमा लेख्नु भएको होला तब त यो झनै गडबड........। कारण विमल जीको यो गजल संग्रहमा कुल ४(चार) वटा गजल दोहोरिएको छ । गजल संग्रहको कभर पेज अर्थात्, शुद्ध रूपले हेर्दा यो गजल संग्रहमा कुल ९६ वटा गजल रहेको छ । मलाई विमल जी जस्तो साहित्यकार संग यस्तो आशा थिएन की वहाँ पहिलो हुनकै लागि यस्तो कार्य गर्नु हुन्छ । इतिहासलाई आफ्नो फाइदाका लागि गलत साबित गर्नु हुन्छ । अब नेपालका विद्वान समीक्षकहरूले भन्नु हुन्छ कि के कुरा छ । मेरो टिप्पणी मात्र इतिहास शुद्धताको लागि छ । गजल संख्...