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  1. बहराउ यौ मैथिल घरसँ मोनमे ई ठानि कऽ
    लेबे करब मिथिला राज्य आब छाती तानि कऽ

    हे वीर मैथिल देखाक वीरता अभिमानसँ
    आजाद मिथिलाकेँ लेल सब लडू समधानि कऽ

    हो गाम या शहर छी कतहुँ मुदा सब ठामसँ
    आबू करू आन्दोलन रहब जँ मिथिला आनि कऽ

    मेटा रहल अछि पहचान देखिते भूगोलसँ
    अस्तित्व ई धरतीकेँ बचाउ माए जानि कऽ

    इतिहास मिथिलाकेँ दैत अछि गवाही कुन्दन
    ई भूमि छी विद्वानक सदति चलल सब मानि कऽ

    मात्राक्रम : 2212-2221-2122-211

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  2. बाल गजल

    Friday, December 12, 2014

    Kundan Kumar Karna

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  3. फूल पर बैस खेलै छै तितली
    डारि पर खूब कूदै छै तितली

    भोर आ साँझ नित दिन बारीमे
    गीत गाबैत आबै छै तितली

    लाल हरिअर अनेको रंगक सभ
    देखमे नीक लागै छै तितली

    पाँखि फहराक देखू जे उडि-उडि
    दूर हमरासँ भागै छै तितली

    नाचबै हमहुँ यौ कुन्दन भैया
    आब जेनाक नाचै छै तितली

    मात्रक्रम : 212-2122-222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  4. गजल

    Sunday, December 7, 2014

    दुख केर मारल छी ककरा कहू
    केहन अभागल छी ककरा कहू

    हम आन आ अप्पनकेँ बीचमे
    सगरो उजारल छी ककरा कहू

    नै जीत सकलहुँ आगू नियतिकेँ
    जिनगीसँ हारल छी ककरा कहू

    बनि पैघ किछु नव करऽकेँ चाहमे
    दुनियाँसँ बारल छी ककरा कहू

    कुन्दन पुछू संघर्षक बात नै
    दिन राति जागल छी ककरा कहू

    मात्राक्रम : 221-222-2212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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