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  1. बाल गजल

    Friday, December 12, 2014

    फूल पर बैस खेलै छै तितली
    डारि पर खूब कूदै छै तितली

    भोर आ साँझ नित दिन बारीमे
    गीत गाबैत आबै छै तितली

    लाल हरिअर अनेको रंगक सभ
    देखमे नीक लागै छै तितली

    पाँखि फहराक देखू जे उडि-उडि
    दूर हमरासँ भागै छै तितली

    नाचबै हमहुँ यौ कुन्दन भैया
    आब जेनाक नाचै छै तितली

    मात्रक्रम : 212-2122-222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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