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  1. गजल

    Sunday, March 29, 2015

    अहाँ बिनु नै जी सकब हम
    अलग रहि करि की सकब हम

    बिछोड़क ई नोर नैनक
    बहल कोना पी सकब हम

    जरल मोनक वेदना ये
    कते सहि सजनी सकब हम

    मिलत जे प्रेमक सुईया
    हिया फाटल सी सकब हम

    विरहमे नित आब कुन्दन
    बिता नै जिनगी सकब हम

    बहरे-मजरिअ (1222-2122)

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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