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  1. Kundan Kumar Karna

    घर छोडि डरमे जी रहल छी
    एहन शहरमे जी रहल छी

    दिन राति छी काटैत एना
    जेना कहरमे जी रहल छी

    संसार अपनेमे मगन छै 
    भगवान भरमे जी रहल छी

    प्रकृतिसँ हारल अछि परिस्थिति
    कालक असरमे जी रहल छी

    मजबूर छी जिनगीसँ कुन्दन
    तँइ एसगरमे जी रहल छी

    मात्राक्रम : 221-222-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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