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  1. फरिछाक देखू सभटा नाताक बिस्तारमे
    निःस्वार्थ भेटत भाई बहिनेक संसारमे

    कतबो करत अपनामे झगड़ा लड़ाई मुदा
    छल नै रहत कनियो ककरो डांट फटकारमे

    अनमोल बन्धन थिक ई एहन सिनेहक अटल
    पाएत नै केओ भगवानोक दरवारमे

    राखीक धागा छी बहिनक आश विश्वास यौ
    आशीष पाबै छै भाई जैसँ उपहारमे

    ईवर दए हमरा कुन्दन सभ जनममे बहिन
    जिनगी बितै नै कहियो बिनु नेह अन्हारमे

    मात्राक्रम : 221-222-2221-2212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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