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  1. गजल

    Friday, September 2, 2016

    कर्ममे एना रमा जाउ संगी
    स्वर्गमे सिड़ही लगा जाउ संगी

    भेटलै ककरा कथी मेहनत बिनु
    बाट गन्तव्यक बना जाउ संगी

    नै घृणा ककरोसँ नै द्वेष राखू
    नेह चारु दिस बहा जाउ संगी

    चित्तमे सुनगत अनेरो जँ चिन्ता
    धूँइयामे सब उड़ा जाउ संगी

    ठेस लागल ओकरे जे चलल नित
    डेग उत्साहसँ बढा जाउ संगी

    किछु करु हो जैसँ कल्याण लोकक
    नाम दुनियामे कमा जाउ संगी

    ओझरी छोड़ाक जिनगीक आबो
    संग कुन्दनके बिता जाउ संगी

    फाइलुन–मुस्तफइलुन–फाइलातुन

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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