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  1. बाल गजल

    Sunday, May 17, 2020

    प्रकृति केर लीला अदभूत
    टिकल केहनो नै मजगूत

    चलल पूरबा छै धुरझार
    हवामे उड़ल टिकली फूत

    सजल छै समुच्चा संसार
    विधाताक रचना अजगूत

    कहल गेल बालक अवतार
    मनुष भूमि पर दैवक दूत

    उठब भिनसरे भोरे भोर
    समय पर हमर बौआ सूत

    उगल रवि किरण बदरी चीर
    गगनमे परम छवि साबूत

    लगनशील रहबै सब दिन जँ
    सफलता मिलत मिथिला पूत

    फऊलुन्-फऊलुन्-मफ़ऊल

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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