Rss Feed
  1. गजल

    Thursday, June 28, 2018

    दर्दके सेहो ई दर्द दर्दनाक बुझाइ छै
    लोक छै किछु जकरा लेल सब मजाक बुझाइ छै

    एक छनमे बन्हन तोड़ि गेल बात बनाक ओ
    आब नाता हमरो सूतरीक टाक बुझाइ छै

    सोझके दुनियामे के पुछै समाज जहर बनल
    नैन्ह टा बच्चा आ बूढ़ सब चलाक बुझाइ छै

    धुंइया जोरक उठलै पड़ोसियाक दलानमे
    रचयिता एहन षड्यंत्र केर पाक बुझाइ छै

    मोंछ पर तेजी ओकीलबा घुमाक दएत छै
    कचहरीके मुद्दामे बढल तलाक बुझाइ छै

    2122-2221-2121-1212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  2. गजल

    Tuesday, June 19, 2018

    जुआनीके पहिल उत्सव मनेलौं हम
    हियामे ओकरा जहिया बसेलौं हम

    सुरुआते गजब छल सोलहम बरिसक
    अचानक डेग यौवन दिस बढेलौं हम

    उचंगाके कमी नै टोलमे कोनो
    नजरि मिलिते इशारामे बजेलौं हम

    गवाही चान तारा छै पहिल मिलनक
    कलीके संग भमरा बनि फुलेलौं हम

    असानी छै कहाँ टिकनाइ नेही बनि
    समाजक रीतमे शोणित बहेलौं हम

    कलम कापी किताबक कोन बेगरता
    जखन इतिहासमे प्रेमी लिखेलौं हम

    चिरै सन मोन ई उड़िते रहल कुन्दन
    असम्भवपर किए असरा लगेलौं हम

    बहरे-हजज (1222×3)

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  3. गजल

    Wednesday, May 30, 2018

    की कहू मोनमे किछु फूराइत नै अछि आइ काइल
    ओकरा छोड़ि केओ सोहाइत नै अछि आइ काइल

    मोहिनी रूप ओकर केलक नैना पर कोन जादू
    चेहरा आब दोसर देखाइत नै अछि आइ काइल

    नेह जहियासँ भेलै हेरा रहलै सुधि बुधि दिनोदिन
    बात दुनियाक कोनो सोचाइत नै अछि आइ काइल

    शब्द जे छल हमर लग पातीमे लिखि सब खर्च केलौं 
    भाव मोनक गजलमे बहराइत नै अछि आइ काइल

    संग जिनगीक कुन्दन चाही ओकर सातो जनम धरि
    निन्नमे आँखि आरो सपनाइत नै अछि आइ काइल

    2122-1222-2222-2122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  4. गजल

    Friday, May 18, 2018

    ओकर संग ई जिनगीक असान बना देलक
    सुख दुखमे हृदयके एक समान बना देलक

    बुढ़हा गेल छल यौ बुद्धि विचार निराशामे
    ज्ञानक रस पिआ ओ फेर जुआन बना देलक

    अध्यात्मिक जगतके बोध कराक सरलतासँ
    हमरा सन अभागल केर महान बना देलक

    चाहक ओझरीमे मोन हजार दिशा भटकल
    अध्ययनेसँ तृष्णा मुक्त परान बना देलक

    अष्टावक्र गीता लेल विशेष गजल कुन्दन
    कहितेमे हमर मजगूत इमान बना देलक

    2221-2221-121-1222

    (तेसर शेरक पहिल मिसराक अन्तिम 
    लघुके दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि)

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  5. Thursday, April 26, 2018

    तस्वीर: भोरूकवा (Sunshine)
    अार्ट: कुन्दन कुमार कर्ण

    Sunshine
    By: Kundan Kumar Karna



    Reactions: 
    |
    |


  6. गजल

    Monday, April 23, 2018

    तोरा बिना चान ताराक की मोल
    रंगीन संसार साराक की मोल

    अन्हारमे जे हमर संग नै भेल
    दिन दूपहरिया सहाराक की मोल

    चुप्पीक गम्भीरता बुझि चलल खेल
    लग ओकरा छै इशाराक की मोल

    संवेदना सोचमे छै जकर शुन्य
    नोरक बहल कोन धाराक की मोल

    अपने बना गेल हमरा जखन आन
    कुन्दन कहू ई विचाराक की मोल

    221-221-221-221

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  7. गजल

    Sunday, April 8, 2018

    केओ सम्मानक भूखल 
    केओ पकवानक भूखल

    अपने आकांक्षा खातिर
    पण्डा भगवानक भूखल

    करनी धरनी छाउर सन
    नेता गुनगानक भूखल

    धरतीपर चल' नै जानै
    कवि छथि से चानक भूखल

    अपना चाहे जे किछु हो
    अनकर नुकसानक भूखल

    संतुष्टी सपना लोकक
    सब अनठेकानक भूखल

    22-222-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |