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  1. गजल

    Sunday, January 3, 2021

    मैथिली गजल
    मैथिली गजल

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  2. साँच बजलासँ मारल गेलियै 
    देश दुनियाँसँ बारल गेलियै 

    स्वार्थ जेना सफल भेलै जकर 
    तकरा लग तेना धारल गेलियै 

    ओकरा जीतकें छल लोलसा 
    ओकरे लेल हारल‌ गेलियै 

    फूल फल आ हवा देलौं मुदा 
    जड़िसँ हमहीं उखारल गेलियै 

    नग्नकें बीच 'कुन्दन' वस्त्रमे 
    दोषी देखा उघारल गेलियै 

    2122-122-212 

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  3. गजल

    Wednesday, December 23, 2020

    चलाकक शहरमे चलाकी कऽ विधि जानि लेलौं 
    गजब भेल चालनिसँ हम पानि जे छानि लेलौं 

    बहुत दिनसँ खोजैत रहियै अपन शत्रुके हम 
    अचानक नजरि ऐना पर गेल पहिचानि लेलौं 

    मिला देत ओ माटिमे हमरा धमकी दऽ गेलै 
    जनमि गाछ छू लेब हमहूँ गगन ठानि लेलौं 

    कते साक्ष्य प्रस्तुत करू आर प्रेमक परखमे 
    अहाँ केर पाथर हिया देवता मानि लेलौं 

    कलीके खिलल‌ देखि बचपन पड़ल मोन काइल 
    भसाबैत निर्मालके देखिते आइ हम कानि लेलौं 

    विरहमे किए मित्र जिनगी बितेबै अनेरो 
    पहिल छोड़ि गेलै त की दोसरो आनि लेलौं 

    अलग बात छै ई जे हम होशमे नै छी 'कुन्दन' 
    भले लड़खड़ाइत अपन ठाम ठेकानि लेलौं 

    122-122-122-122-122 
    (बहरे मुतक़ारिब मोअश्शर सालिम) 

    © कुन्दन कुमार कर्ण 
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  4. Saturday, November 14, 2020

    दीयावती
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  5. गजल

    Monday, September 14, 2020

    दोसरकें बात पर नै उछल
    एको डेग अपनासँ तूँ चल

    अपने वुद्धि काज देतौ‌ रे
    चाहे छी मूर्ख चाहे पढ़ल

    लोहा सेहो लीबि जाइ छै
    बोली जे रहतौ मीठ सरल

    संघर्षे कऽ नाम छै जिनगी
    घर बैसि भेटलै ककरा फल 

    शमशान रहल हेतै कहियो
    जै ठां देखै छी आइ महल

    ओकर चुप्पी बुझाइ नाटक
    ओ जे बाजै त लागै गजल

    दुनियासँ भागब किए कुन्दन
    दलदलमे रहि खिलै छै कमल

    बहरे मीर

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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