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Friday, September 22, 2017

गजल

भाव शुद्ध हो त मोनमे भय कथीके
छोड़ि मृत्यु जीव लेल निश्चय कथीके

जे सृजन करै सफल करै से बिसर्जन
छूछ हाथ सब चलल ककर छय कथीके

शक्तिमे सदति रहल कतौ आइ धरि के
किछु दिनक उमंग फेर जय-जय कथीके

तालमेल गीतमे अवाजक जरूरी
शब्दमे सुआद नै तखन लय कथीके

जाति धर्मके बढल अहंकार कुन्दन
रहि विभेद ई समाज सुखमय कथीके

212-1212-122-122

© कुन्दन कुमार कर्ण

Thursday, September 14, 2017

गजल

हटितो नै देरी
सटितो नै देरी

सत्ताके खातिर
कटितो नै देरी

छन भरिमे दुनिया
बटितो नै देरी

बढ़लाहा टिरबी
घटितो नै देरी

निष्ठा जे जागल
डटितो नै देरी

लड़की हो चंचल
पटितो नै देरी

संकटमे कोढिया
खटितो नै देरी

देहक की निश्चित
लटितो नै देरी

नवका छै कपड़ा
फटितो नै देरी

बिसरल नाओके
रटितो नै देरी

ओ हियमे कुन्दन
अटितो नै देरी

22-222

© कुन्दन कुमार कर्ण

Sunday, September 10, 2017

गजल

चान दर्शनके लोलसा जागल घोघ उघारू प्रिय
राति पूनमके छै निहोरा नै आइ नकारू प्रिय

छल पिआसल ई मोन लिअ ने छातीसँ सटा हमरा
आश पूरा मिलनक करू दुन्नू हाथ पसारू प्रिय

फूल झाँपल पत्तासँ शोभा फुलबारिक नै दै छै
माथ परके चुनरी गुलाबी आस्तेसँ ससारू प्रिय

प्रेम जीवन प्रेमे जगतमे रहि जाइ अमर छै ये
सात जन्मक संगी बना परमात्माक पुकारू प्रिय
 
नै पुछू लागैए मजा केहन नैन मिला कुन्दन
तीर नैनक सोझे करेजा पर मारि निहारू प्रिय

2122-2212-2221-1222

© कुन्दन कुमार कर्ण

Friday, August 18, 2017

गजल

बढलै देश-देश बीच हथियारक प्रतिस्पर्धा
राष्ट्रियताक नाम पर अहंकारक प्रतिस्पर्धा

मानवताक गप्प लोक कतबो करै जमानामे
देखल बेवहारमे तिरस्कारक प्रतिस्पर्धा

पेन्टागनसँ कोरिया सहनशीलता कतौ नै अछि
मिसियो बात लेल भेल ललकारक प्रतिस्पर्धा

साहित्यिक समाजमे चलल राजनीति सम्मानक
लेखन पर धिआन नै पुरस्कारक प्रतिस्पर्धा

धरती एक टा अकास एके समान छै कुन्दन
भरि मुट्ठीक माटि लेल सरकारक प्रतिस्पर्धा

2221-2121-2212-1222

© कुन्दन कुमार कर्ण