Rss Feed
  1. गजल

    Friday, September 22, 2017

    भाव शुद्ध हो त मोनमे भय कथीके
    छोड़ि मृत्यु जीव लेल निश्चय कथीके

    जे सृजन करै सफल करै से बिसर्जन
    छूछ हाथ सब चलल ककर छय कथीके

    शक्तिमे सदति रहल कतौ आइ धरि के
    किछु दिनक उमंग फेर जय-जय कथीके

    तालमेल गीतमे अवाजक जरूरी
    शब्दमे सुआद नै तखन लय कथीके

    जाति धर्मके बढल अहंकार कुन्दन
    रहि विभेद ई समाज सुखमय कथीके

    212-1212-122-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  2. गजल

    Thursday, September 14, 2017

    हटितो नै देरी
    सटितो नै देरी

    सत्ताके खातिर
    कटितो नै देरी

    छन भरिमे दुनिया
    बटितो नै देरी

    बढ़लाहा टिरबी
    घटितो नै देरी

    निष्ठा जे जागल
    डटितो नै देरी

    लड़की हो चंचल
    पटितो नै देरी

    संकटमे कोढिया
    खटितो नै देरी

    देहक की निश्चित
    लटितो नै देरी

    नवका छै कपड़ा
    फटितो नै देरी

    बिसरल नाओके
    रटितो नै देरी

    ओ हियमे कुन्दन
    अटितो नै देरी

    22-222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  3. गजल

    Sunday, September 10, 2017

    चान दर्शनके लोलसा जागल घोघ उघारू प्रिय
    राति पूनमके छै निहोरा नै आइ नकारू प्रिय

    छल पिआसल ई मोन लिअ ने छातीसँ सटा हमरा
    आश पूरा मिलनक करू दुन्नू हाथ पसारू प्रिय

    फूल झाँपल पत्तासँ शोभा फुलबारिक नै दै छै
    माथ परके चुनरी गुलाबी आस्तेसँ ससारू प्रिय

    प्रेम जीवन प्रेमे जगतमे रहि जाइ अमर छै ये
    सात जन्मक संगी बना परमात्माक पुकारू प्रिय
     
    नै पुछू लागैए मजा केहन नैन मिला कुन्दन
    तीर नैनक सोझे करेजा पर मारि निहारू प्रिय

    2122-2212-2221-1222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  4. गजल

    Friday, August 18, 2017

    बढलै देश-देश बीच हथियारक प्रतिस्पर्धा
    राष्ट्रियताक नाम पर अहंकारक प्रतिस्पर्धा

    मानवताक गप्प लोक कतबो करै जमानामे
    देखल बेवहारमे तिरस्कारक प्रतिस्पर्धा

    पेन्टागनसँ कोरिया सहनशीलता कतौ नै अछि
    मिसियो बात लेल भेल ललकारक प्रतिस्पर्धा

    साहित्यिक समाजमे चलल राजनीति सम्मानक
    लेखन पर धिआन नै पुरस्कारक प्रतिस्पर्धा

    धरती एक टा अकास एके समान छै कुन्दन
    भरि मुट्ठीक माटि लेल सरकारक प्रतिस्पर्धा

    2221-2121-2212-1222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  5. - कुन्दन कुमार कर्ण

    बेलायती वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विनक विकासवादी सिद्वान्त अनुसार पृथ्वी पर रहल सम्पूर्ण जीवित प्राणी जियबाक लेल संघर्ष करैत रहै छै आ जे संघर्षमे सफल भ' जाइ छै सएह जियबै छै । मुदा, जखन प्रकृति आ राज्य दुन्नू कोनो समुदायके विपरीत भ' जाइ तँ ओहन परिस्थितिमे लाख संघर्ष केलाक बादो ओहि समुदायके दृष्टिकोणसँ डार्विनक सिद्धान्त गलत साबित भ' सकैए ।

    मिथिला/मधेशक लोक राजनीति आ प्रकृति दुन्नूक चपेटमे छै । बाढि मिथिला/मधेशक निअति बनि गेल छै । प्रत्येक बरिस लोक एहिसँ पीडित आ आक्रान्त होइ छै । कोनो पांच दश बरिससँ नै । सैकड़ौ बरिससँ । बाढि आबि लोकवेद, धनमाल, पोखरि क' मांछ, घर, अनाज सब देहाक ल' जाइ छै । राष्ट्रिय, अन्तराष्ट्रिय मिडियामे खूब चर्चा होइ छै । ढेर रास संघ संस्थाद्वारा राहत संकलन होइ छै ।

    बंटाइ छै । सरकारद्वारा अनुदानक घोषणा कएल जाइ छै । बस किछु महिनाबाद सब बिसरि जाइ छै । अगिला बरिस फेर वएह रवैया । आखिर कहिया धरि ई चक्र चलैत रहतै ? एकर दीर्घकालीन निपटाराक उपाय की ?

    सामान्य रुपसँ सोचल जाइ तँ बाढि प्राकृतिक विपतिके रुपमे नजरि आएत मुदा नेपालक सन्दर्भमे जँ गहिरगर अध्ययन करबै तँ एहिमे नितान्त राजनीतिक रंग भेटत । ऐतिहासिक छल भेटत । राजा महेन्द्रद्वरा पुनर्वास कार्यक्रमक नाम पर तरार्इ क्षेत्रक वन दोहन करैत लाखौ पहाडीके बस्ती तरार्इमे बसेनाइ (एखनो जारी छै), चूरे क्षेत्रसँ अवैध रुपसँ बाउल आ गिट्टीक निकाशी भेनाइ, रक्तचन्दन, सिसौ, खयर लगायत अन्तराष्ट्रिय बजारमे महगमे बिकैवला गाछी सभ तस्करी भेनाइ, सरकारी सन्यन्त्रमे एके टा समुदायके हालीमुहानी भेनाइ, विकास प्रशासनमे रहल भ्रष्टाचार, राष्ट्रिय योजना आयोगक लापरबाही, मौसम विभागके काजक पुराने तरिका, राज्यक उपनिवेशवादी सोच (राज्यद्वारा पहाडभे आएल भू-कम्प राष्ट्रिय संकट आ मधेशमे आएल बाढिक क्षेत्रीय संकटके रुपमे चित्रण केनाइ) आदी कारण सब भेटत ।

    विश्वमे नेपाल एहन देश छै जतए राजनीति केनाइ सभसँ असान छै । कोनो समस्या भेलै तँ भारतके दोषी देखाक अहाँ अपन माथ परसँ बोझ उतारि सकै छी । अपन असक्षमता झांपि सकै छी । अपन अकर्मण्यताके तोपि सकै छी । बस बात खत्तम । एखन बाढी सनके विपतिमे सेहो तेहने देखल जा रहल छै ।

    मौसमके पूर्वानुमानमे आधुनिक प्रविधिक प्रयोग क' र्इन्टरनेट लगायत सञ्चारक विभिन्न माध्यमसँ विपतिके पूर्व सूचनाक प्रसारण, पछिला अनुभवके आधार पर पूर्व तयारी आ नदी सभक प्रकृतिक सम्बन्धमे एक उच्चस्तरीय अध्ययन क' नेपाल आ भारतक दुन्नू सरकारक प्रभावकारी समन्वयसँ बाढिसँ होइवला जनधनके क्षती कम कएल जा सकै छै ।
    Reactions: 
    |
    |


  6. गजल

    Sunday, July 30, 2017

    भरल बरिसातमे नै सताउ सजनी
    किए छी दूर लग आबि जाउ सजनी

    मिलनके आशमे अंग-अंग तरसै
    बदन पर वुँद नेहक गिराउ सजनी

    पिआसल मोन मधुमासमे उचित नै
    जुआनी ओहिना नै गमाउ सजनी

    जियब जा धरि करब नेह हम अहीँके
    हियामे रूप हमरे सजाउ सजनी

    खुशीमे आइ कुन्दन गजल सुनाबै
    मजा एहन समयके उठाउ सजनी

    122-212-212-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  7. गजल

    Monday, July 17, 2017

    अपनके अपना हिसाबे बुझू
    रचलके रचना हिसाबे बुझू

    असलमे सब किछु रहै छै कहूँ
    सृजनके सृजना हिसाबे बुझू

    हिया पर शब्दक असर जे पड़ै
    गजलके गहना हिसाबे बुझू

    कहाँ भेटत सोच उठले सभक
    धसलके धसना हिसाबे बुझू

    जरनिहारोके कतहुँ नै कमी
    जरलके जरना हिसाबे बुझू

    अतीतक नै याद कुन्दन करू
    घटलके घटना हिसाबे बुझू

    122-221-2212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |