Rss Feed
  1. गजल

    Sunday, April 8, 2018

    केओ सम्मानक भूखल 
    केओ पकवानक भूखल

    अपने आकांक्षा खातिर
    पण्डा भगवानक भूखल

    करनी धरनी छाउर सन
    नेता गुनगानक भूखल

    धरतीपर चल' नै जानै
    कवि छथि से चानक भूखल

    अपना चाहे जे किछु हो
    अनकर नुकसानक भूखल

    संतुष्टी सपना लोकक
    सब अनठेकानक भूखल

    22-222-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  2. गजल

    Monday, March 5, 2018

    अस्तित्वमे अस्तित्व समा जेतै एक दिन
    अपनाक अपने संग मिला जेतै एक दिन

    बिनु शब्द आ संगीत मिलनके बेर प्रकृति
    शुन्ना समयमे गीत सुना जेतै एक दिन

    नै हम रहब नै देह रहत रहतै बोध टा
    दुख दर्द सब जिनगीक परा जेतै एक दिन

    मस्तिष्कके सुख दुखसँ उपर लेबै जे उठा
    आनन्दमे र्इ मोन डुबा जेतै एक दिन

    बहिते हृदयमे जोरसँ कुन्दन नेहक हवा
    चैतन्य केर ज्ञात करा जेतै एक दिन

    2212-221-1222-212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  3. बाल गजल

    Saturday, February 10, 2018

    पापा यौ चकलेट खेबै
    कनिये नै भरिपेट खेबै

    छुछ्छे कोना नीक लगतै
    नमकिन बिस्कुट फेंट खेबै

    हमहीं टा नै एसगर यौ
    संगी सभके भेंट खेबै

    मानब एके टासँ नै हम
    पूरा दू प्याकेट खेबै

    कुन्दन भैया आबि जेथिन
    बांकी ओही डेट खेबै

    222-221-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  4. बाल गजल

    Saturday, February 3, 2018

    बौआ हमर छै बुधिआर
    लोकक करै छै सत्कार

    ज्ञानी जकाँ कनिये टासँ
    माएसँ सिखलक संस्कार

    संगी बना ओ पोथीक
    मानै कलमके संसार

    खाना समयपर खेलासँ
    देखू बनल छै बौकार

    हँसिते रहल सदिखन खूब
    मुस्कान देलक उपहार

    कुन्दनसँ खेलाइत काल
    जितबाक केलक जोगार

    बहरे - मुन्सरह

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  5. गजल

    Friday, January 19, 2018

    कोनो दर्दमे आइ धरि मिठास नै छल
    भरिसक मोनमे प्रेमिकाक बास नै छल

    मिलिते नैन तोरासँ ठोर बाजि उठलै
    अनचिन्हारके टोकितों सहास नै छल

    सुन्नरताक संसारमे कमी कहाँ छै
    आरो लेल केने हिया उपास नै छल

    नेहक लेल भेलौं बताह नै तँ कहियो
    जिनगी एहि ढंगक रहल उदास नै छल

    प्रियतम बिनु जुआनी कटति रहै अनेरो
    लागल जोरगर चाहके पिआस नै छल

    यौवन देखलौं सृष्टिमे अनेक कुन्दन
    एहन पैघ भेटल कतौं सुवास नै छल

    2221-2212-121-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |


  6. गजल

    Tuesday, January 9, 2018

    नै उलहन कोनो नै उपराग तोरासँ
    भरिसक बनतै दोसरके भाग तोरासँ

    जियबै जिनगी हम माली बनिक' भमरासँ
    सजतै ककरो मोनक जे बाग तोरासँ

    पूरा हेतै से की सपनाक ठेकान
    अभिलाषा छल जे सजितै पाग तोरासँ

    तोंही छलही सरगम शुर ताल संगीत
    छुछ्छे आखर रहने की राग तोरासँ

    मेटा लेबै कुन्दन दुनियासँ अपनाक
    रहतै जिनगीमे नै किछु दाग तोरासँ

    222-222-221-221

    © कुन्दन कुमार कर्ण
    Reactions: 
    |
    |