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  1. काठमाण्डू, ०७ नोभेम्बर, २०१५ 
    "वर्तमान राजनीतिक सन्दर्भ आ मैथिलीक भविष्य" विषय पर प्राज्ञ रमेश रञ्जन झा जीक अध्यक्षता आ प्रा.डा. राम अवतार यादव जीक प्रमुख आतिथ्यमे बालुवाटार, काठमाण्डूमे मैथिली साहित्यिक गोष्ठी सम्पन्न भेल अछि । कार्यक्रममे साहित्यकार धीरेन्द्र प्रेमर्षि मन्तव्य व्यक्त करैत कहलनि जे राज्य मैथिलीप्रति सदति पूर्वाग्रही रहल अछि । तहिना प्रा.डा. राम अवतार यादव कहलनि जे मैथिली संकट अवस्थामे रहितो जीवित अछि । मैथिलीकेँ लेल कतेक काज केलहुँ से महत्वपूर्ण नै, काजक स्तरीयता महत्वपूर्ण हए छै । कार्यक्रममे रूपा झा, विजय दत्त, विनीत ठाकुर, श्याम शेखर झा लगायतकेँ सर्जक सभ अपन रचना प्रस्तुत केने छल । कार्यक्रमक ब्यवस्थापन निराजन झा एवं संचालन आ आयोजन कुन्दन कुमार कर्ण केने छल ।

    कार्यक्रमक सम्पूर्ण विवरण तस्वीरमे


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  2. शराब पर गजल

    Wednesday, September 9, 2015


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  3. तोहर याद नै आबै तँइ पी लए छी हम
    जिनगी आब दारुमे डुबि जी लए छी हम

    मतलब कोन छै हमरा दुनियासँ तोरा बिनु
    अपनेमे मगन रहि ककरो की लए छी हम

    दर्दक अन्हरीयामे पिअबाक मानक नै
    कहियो काल कम कहियो बेसी लए छी हम

    छै अलगे मजा स्वर्गक चुमनाइमे बोतल
    तोहर ठोर बुझि नित चुमि सजनी लए छी हम

    मजबूरी कहू या हिस्सक या नियत कुन्दन
    बस दुनियाक आगू बनि नेही लए छी हम

    मात्राक्रम : 2221-222-22-1222

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  4. फरिछाक देखू सभटा नाताक बिस्तारमे
    निःस्वार्थ भेटत भाई बहिनेक संसारमे

    कतबो करत अपनामे झगड़ा लड़ाई मुदा
    छल नै रहत कनियो ककरो डांट फटकारमे

    अनमोल बन्धन थिक ई एहन सिनेहक अटल
    पाएत नै केओ भगवानोक दरवारमे

    राखीक धागा छी बहिनक आश विश्वास यौ
    आशीष पाबै छै भाई जैसँ उपहारमे

    ईवर दए हमरा कुन्दन सभ जनममे बहिन
    जिनगी बितै नै कहियो बिनु नेह अन्हारमे

    मात्राक्रम : 221-222-2221-2212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  6. गजल

    Thursday, August 27, 2015

    कली त खिलल मुदा फुला नै सकल
    हृदयसँ गुलाब बनि लगा नै सकल

    वसंत बहार सन पहर छल मुदा
    सिनेहसँ बाग ओ सजा नै सकल

    कथीक कमी छलै हमर नेहमे
    खुशीसँ किएक ओ बता नै सकल

    बताह बनाक छोडि हमरा चलल
    पियास हियाक ओ बुझा नै सकल

    नसीब हमर खराब कुन्दन छलै
    हिया त मिलल अपन बना नै सकल

    मात्राक्रम : 12112-1212-212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  7. जहिना दीपमे तेल जरूरी हए छै
    तहिना नेहमे मेल जरूरी हए छै

    जितबा लेल जिनगीक जुआमे मनुषकेँ
    अपने किस्मतक खेल जरूरी हए छै

    नेहक बाटपर जाइ बड़ी दूर तेहन
    विश्वासक चलब रेल जरूरी हए छै

    हितमे काज केनाइ समाजक असलमे
    लोकप्रिय बनै लेल जरूरी हए छै

    बिनु संघर्ष जिनगीक मजा कोन कुन्दन
    कहियो काल किछु झेल जरूरी हए छै

    मात्राक्रम : 2221-221-122-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  8. करितै नेह जँ केओ अथाह हमरो
    रहितै मोन खुशीमे बताह हमरो

    नेही एक बनी हमहुँ साँच ककरो
    अछि जिनगीक रहल आब चाह हमरो

    बनि घटवाह निमन भेट जाइ संगी
    हेतै पार सफलताक नाह हमरो

    कविता गीत गजल आ अवाज सुनिते
    कहितै लोक जखन वाह वाह हमरो

    मिलिते आइ नजरि ओकरासँ कुन्दन
    मोने मोन भऽ गेलै निकाह हमरो

    मात्राक्रम : 2221-122-121-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  9. ओकर यादक आइ फेरो विर्रो उठल हियामे
    उडिया गेलौं हम बिहारि प्रेमक बहल हियामे

    जादू मौसमकेँ असर केलक मोन पर हमर जे
    आस्ते–आस्ते दर्द मिठगर नेहक बढल हियामे

    अन्चोकेमे चान दिस ई चंचल नजरि कि गेलै
    छल पूनमकेँ राति सूरत ओकर सजल हियामे

    जा धरि ठठरी ठार रहतै मरिते रहब अहाँपर
    खाइत शप्पत हम कहै छी प्रिय ई गजल हियामे

    मोनक सेहन्ता हमर छल ललका गुलाब कुन्दन
    ककरा सभ किछु भेटलै ऐठाँ जे रहल हियामे

    मात्राक्रम : 2222-2122-2212-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  10. गजल

    Sunday, June 21, 2015

    साँच नेह कहियो धोखा नै दए छै
    मोनमे बिछोड़क फोंका नै दए छै

    एक बेर जे बुझियौ छुटि गेल संगी
    बेर-बेर किस्मत मौका नै दए छै

    देखियोक लगमे अन्ठा देत सदिखन
    एक छुटलहा हिय टोका नै दए छै

    त्याग साधना आ नित चाही तपस्या
    साँच नेह ईश्वर ओना नै दए छै

    दोहराक कुन्दन नेहक बात नै कर
    साँझमे पराती शोभा नै दए छै

    मात्राक्रम : 212-122-222-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  11. दिनांक 28.05.2015 : काठमाण्डू महानगर पालिका द्वारा संचालित आ राष्ट्रिय सभागृहसँ प्रसारणरत मेट्रो एफ.एम. 94.6 मेगाहर्ज पर कार्यक्रम मिथिलाञ्चलमे कार्यक्रम संचालक सरोज खिलाडी द्वारा कएल गेल मैथिली गजल आ साहित्य सम्बन्धि प्रत्यक्ष साक्षात्कार कालमे लेल गेल र्इ तस्वीर ।



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  12. Kundan Kumar Karna

    घर छोडि डरमे जी रहल छी
    एहन शहरमे जी रहल छी

    दिन राति छी काटैत एना
    जेना कहरमे जी रहल छी

    संसार अपनेमे मगन छै 
    भगवान भरमे जी रहल छी

    प्रकृतिसँ हारल अछि परिस्थिति
    कालक असरमे जी रहल छी

    मजबूर छी जिनगीसँ कुन्दन
    तँइ एसगरमे जी रहल छी

    मात्राक्रम : 221-222-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  13. सम्पूर्ण भूकम्प पीड़ित आ एहि कारणे अपना सभक बीचसँ गुजरलप्रति श्रद्धाञ्लीस्वरूप समर्पित ई गजल

    जै ठाँ छल काइल नित जिनगीक मुस्कान
    तै ठाँ बस नोरक रहि गेलै किए स्थान

    हे ईश्वर ई केहन खेल प्रकृति केर
    लोकक घर जेना अछि बनि गेल शमसान

    गजलक अक्षर-अक्षर कानैत अछि आब
    कहि धरती कोना यौ बनि गेल बइमान

    कहियो सुन्नरता जै देशक रहल शान
    छन भरिमे सभ ओ मेटा गेल पहचान

    आशा मोनक कुन्दन अछि जीविते मोर
    उगबे करतै जिनगीमे एक दिन चान

    मात्राक्रम : 222-222-221-221

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  14. गजल

    Sunday, March 29, 2015

    अहाँ बिनु नै जी सकब हम
    अलग रहि करि की सकब हम

    बिछोड़क ई नोर नैनक
    बहल कोना पी सकब हम

    जरल मोनक वेदना ये
    कते सहि सजनी सकब हम

    मिलत जे प्रेमक सुईया
    हिया फाटल सी सकब हम

    विरहमे नित आब कुन्दन
    बिता नै जिनगी सकब हम

    बहरे-मजरिअ (1222-2122)

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  15. मैथिली सिने संसार पत्रिकाक अगहन/पुष अंकमे प्रकाशित हमर मैथिली गजल विशेष अन्तरवार्ता पर फेसबुक मार्फत प्राप्त किछु महत्वपूर्ण प्रतिकृया :

    Kundan Kumar Karna


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  16. Kundan Kumar Karna
    Holi Ghazal by Kundan Kumar Karna

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  17. खुशीक अनेक रंग सब पर बरसै
    हँसीक इजोर संग जिनगी चमकै

    अबीर गुलाल बीच फगुआ शोभै
    गुलाब समान देह गम-गम गमकै

    उमंग हियासँ नै घटै कहियो धरि
    बसन्त बहार अंगना घर टहलै

    मिलान जुलान केर पावनि थिक ई
    दरेग दयाक चाहमे सब बहकै

    विरान जकाँ रहब हमहुँ नै कुन्दन
    हमर जँ सिनेह लेल केओ तरसै

    मात्राक्रम : 121-121-2122-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  18. मैथिली सिने संसार पत्रिकाक तेसर वार्षिकोत्सव आ अन्तराष्ट्रिय मातृ भाषा दिवसक अवसर पर मधेस मिडिया हाउस, काठमाण्डूमे आयोजित समारोहमे मैथिली गजलमे हमर योगदानक कदरस्वरूप नेपाली फिल्मक बरिष्ट कलाकार नीर शाह द्वारा मैथिली सिने संसार दिससँ प्रदान कयल गेल सम्मान ग्रहण करैत






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  19. गजल

    Saturday, February 21, 2015

    चाहलौँ जकरा हम जान परानसँ
    छोड़ि हमरा से चलि गेल गुमानसँ

    जे कहै जिनगी भरि संग रहब हम
    से करेजा देलक चीर असानसँ

    एखनो टटका अछि दर्द हियामे
    व्यक्त कोना शब्दक करब बखानसँ

    हम त पुजलौँ प्रेमक बनि कऽ पुजगरी
    सत धरम पूरा निस्वार्थ इमानसँ

    जीविते बनि गेलौँ लास जकाँ हम
    हम त गेलौँ कुन्दन एहि जहानसँ

    मात्राक्रम : 2122-2221-122

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  20. प्रस्तुत अछि लोकप्रिय पत्रिका  मैथिली सिने संसारक अगहन–पुष अंकमे प्रकाशित हमर पूरा अन्तरवार्ता


    सप्तरी जिल्लाक एक साधारण परिवारमे जन्मल गजलकार कून्दन कुमार कर्ण कम समयमे बेसी चर्चित भेनिहार युवा गजलकार छी । कनिये टासँ मैथिली साहित्यमे कमल चला रहल कुन्दन अत्यन्त प्रतिभाशाली व्यक्ति छथि । श्री जनता माध्यमिक विद्यालय, खुरहुरीयासँ विद्यालय शिक्षा आर्जन कऽ श्री महेन्दविन्देश्वरी बहुमुखी क्याम्पस, राजविराजसँ ब्यवस्थापनमे स्नातक केनिहार ई नेपाल सरकारक निजामती सेवामे सेहो कार्यरत छथि ।

    विद्यालय जीवन कालसँ गजल रचना सुरु कऽ एखन धरि दर्जनौ गजल रचना कऽ चूकल अछि । हुनकर गजल आ शाइरीसँ मिथिलाक हजारौ युवा प्रभावित छथि । पछिला किछु बरिससँ सामाजिक सञ्जालमे बेसी सकृयताक संग अपन रचना सभ सार्वजनिक करैत आबि रहल हुनकर नेपाल आ भारत दुन्नू देशेमे प्रशंसक सभ छथि । मुदा हनुका एतऽ धरि आबैमे की ? केहन ? कतेक ? संघर्ष करऽ पडलै एहि सम्बन्धमे सुनी “मैथिली सिने संसार”क प्रतिनिधि कमल मण्डल संग भेल हुनकर गप्प सप्प ।

    ▶ अहाँ गजल रचनाक क्षेत्रमे कोना प्रवेश केलहुँ ?
    – कनिये टासँ साहित्य, गीत आ संगीतमे हमर रुची रहि आयल अछि । स्कूल पढैत काल हम अतिरिक्त कृयाकलामे बेसी सहभागी हएत रहिये । विद्यालय जीवनसँ हमर रचना सभ विभिन्न रुपे पत्र–पत्रिकामे प्रकाशित हएत रहै । दर्जनौ पत्र–पत्रिकामे हमर रचना सभ प्रकाशित भऽ चूकल अछि । गजल आ शेर–ओ–शाइरी हम कनिये टासँ पसन्द करै छी । स्कूल आ कलेजक समयमे मैथिलीमे गजल रचना कऽ हम संगी सभकेँ सुनाबैत रही । सभ हमर प्रशंसा करेैत रहै । हमरा प्रोत्साहन करैत रहै । मुदा जहियासँ हम फेसबुक आ ट्वीटर लगायत सामाजिक सञ्जाल मार्फत अपन रचना सार्वजनिक केनाइ सुरु केलहुँ तहियासँ हमर साहित्यिक बाटमे नवका मोड आबि गेल । हम अपन रचना सभ बेसीसँ बेसी लोक धरि पहुँचाबमे सफल भेलहुँ । ढेर रास साहित्यकार सभसँ जुटबाक अवसर सेहो प्राप्त केलहुँ । एहि क्रममे फेसबुक पर हमर भेंट प्रसिद्ध मैथिली गजलकार आशीष अनचिन्हा जीसँ भेलै । ओ हमरा हुनकेँ द्वारा सञ्चालित हुनक ब्लग http://anchinharakharkolkata.blogspot.com सँ जोडलनि । जे कि पूर्ण रुपेन मैथिली गजलसँ सम्बन्धित लेख, आलेखसँ भरल छै । तकर बाद हम गजलक विषयममे गहन अध्ययन केनाइ सुरु कऽ देलहुँ आ पहिल बेर निअमपूर्वक अरबी बहरमे गजल रचना करबामे सफल भेलहुँ । फलस्वरुप आशीष जी द्वारा जानकारी भेटल जे हम मैथिलीमे अरबी बहरमे गजल कहनिहार नेपालक पहिल गजलकार छी । जैसँ हमरा एहि क्षेत्रमे समर्पित भऽ लगबाक लेल आर प्रेरणा प्राप्त भेल ।

    ▶ “अरबी बहर” की छी ?
    – गजल मुख्तः अरबी शब्द छी आ एकर जननी सेहो अरबी साहित्य छी । जेना संस्कृत काव्ज्य परम्परामे “छन्द” हए छै तहिना उर्दू आ फारसी गजल परम्परामे “बहर” हए छै । जेना छन्द कविताक लय निर्धारण करै छै तहिना बहर गजलक लय निर्धारण करै छै । सामान्य भाषामे हम सभ बहरकेँ छन्द बुझि सकै छी मुदा बहर निर्माणक अपने पृथक निअम सभ छै । गजल प्राय कोनो नै कोनो बहरमे कहल जाइ छै । बिना बहरकेँ गजल भै भऽ सकैछ । गजल गीत आ कवितासँ एक अलगे विधा रहलाक कारण अरबी बहरमे गजल रचना करऽ चाहै वला सभकेँ समय खरचा कऽ अध्ययन केनाइ जरुरी छै ।

    ▶ गजल रचनाक क्षेत्रमा प्रवेश करऽ लेल प्रेरणा किनकासँ प्राप्त भेल ?
    – हम महाकवि विद्यापति रचित गीत सभ सुनबालेल बहुत पसन्द करै छी । हुनकासँ प्रभावित सेहो छी । मुदा खास कऽ गजल क्षेत्रमे लगबाक कारण केओ एक व्यक्ति प्रेरक नै छथि । हमर अन्तर आत्मासँ जागल रुची आ मैथिली भाषा एवं संस्कृति प्रतिक प्रेम नै एहि क्षेत्रमे लगबाक प्रमुख कारण छी । एखन हम बहुत लोकसँ ढेर रास सहयोग, शुभकामना आ सिनेह पाबि रहल छी जैसँ हमर मनोबल वृद्धि भऽ रहल छै ।

    ▶ की अहाँ मैथिलीकेँ अलाबा आन भाषा दिस सेहो कलम चला रहल छी ?
    – हम अंग्रेजी, हिन्दी आ नेपालीमे सेहो गजल सभ रचना केने छी ।

    ▶ वर्तमान समयमे विभिन्न विधाक मैथिली पोथी सभ निरन्तर प्रकाशित भऽ रहल छै मुदा एकर उचित बजारीकरण भेल अवस्था नै छै । अर्थात् मैथिली साहित्य व्यावसायीकरण नै भऽ पाबि रहल छै । की एहन अवस्थामे आब आबै पीढी मैथिली साहित्मे अपन योगदान दऽ सकत ?
    – धन्यवाद । बहुत नीक सन्दर्भ उठेलहुँ अहाँ । सभसँ पहिने त छिरीयाल मैथिली गजलकार, साहित्यकार आ कलाकार सभकेँ एक ठाम संगठित भेनाइ जरुरी छै । मिथिलामे एखनो बहुत रास लोक सभ नीक जकाँ मैथिली पढ आ लीख लेल नै जानै छै । एकर मुख्य कारण छी विद्यालय शिक्षा मैथिलीमे प्राप्त नै भेनाइ । मैथिली भाषा आ साहित्यमे गति प्रदान करबा लेल मिथिलामे अनिवार्य रुपमे विद्यालय शिक्षा मैथिलीमे प्रदान केनाइ जरुरी छै । नेपालमे एखन संविधान बनबाकेँ क्रममे अछि । तेँ आब बनै वला संविधानमे विद्यालय शिक्षा मातृभाषामे करबाक प्रावधान लेल हम सभकेँ अपन–अपन क्षेत्रसँ अवाज उठाब पडतै । खुशीक बात त ई छी जे वर्तमान समयमे मिथिलाक बहुत रास युवा युवती सभ मैथिली साहित्य, गीत, संगीत आ कलाक क्षेत्रमे सकृय रुपसँ लागि रहल अछि ।

    ▶ हम अहाँ द्वारा हमल गजल सभ सुनलहुँ । किछु प्रमे आ वियोगक गजल सभ बहुत मार्मिक अछि । की एहन गजल सभमे रहल ब्यथा सभ अहाँकेँ वास्तविक जिनगीसँ सम्बन्धित त नै अछि ।
    – हम हजल, वाल गजल आ भक्ति गजल सेहो रचना केने छी । तहिना राजनीति, दर्शन तथा विभिन्न सामाजिक जीवनसँ जूडल विषय पर सेहो रचना केने छी । समय सन्दर्भ देखिक श्रोता सभकेँ केहन रचना पसन्द आबि सकै छै तै हिसाबे रचऽके प्रयास करै छी । जैमे हमर कल्पना शक्तिक महत्वपस्र्ण भूमिका खेलै छै । अतः हमर कहल गजल सभकेँ हमर वास्तविक जिनगीसँ कोनो सम्बन्ध नै छै ।

    ▶ एखन बजारमे पाप, ¥याप आ आइटम गीत सभ धूम मचा रहल छै । लोक सभ एकरे पसन्द सेहो कऽ रहल छै । एहन अवस्थामामे गजलक औचित्य की ?
    – संसार कतबो बदलतै मुदा सूर्य, पृथ्वी आ चान कहियो नै बदलि सकै छै । तै सूर्यक ठाम पृथ्वी लऽ सकै छै नै त पृथ्वीक ठाम चान । बजारमे बहुत चीज सभ आबै छै आ जाइ छै मुदा किछु चीज लोकक हिया आ दिमागमे सदति लेल बसि जाइ छैक । गजल लोकक भावना आ आत्मासँ जूटल रहै छै । संसार रहला धरि एकर औचित्य कहियो समाप्त नै भऽ सकै छै । हमर कहल गजल सभ एखनो हजारौ लोक सभ पसन्त कऽ रहल छै ।

    ▶ भविष्यक योजना की अछि ?
    – गजल रचनाक निरन्तरता दैत विभिन्न विषयवस्तु पर रचना कऽ मैथिली पाठक सभको मनोरञ्जन प्रदान केनाइ आ जिनगी भरि मैथिली आ मिथिलाक सेवा केनाइ ।

    ▶ वर्तमान युवा पीढी अर्थात नव प्रतिभाक की कहऽ चाहबै ?
    – कहल जाइ छै लोक जतऽ जन्मे छै तै ठामक माटिक ऋण ओकरा पर रहै छै । तै अपन भाषा, संस्कृति, कला आ साहित्सँ प्रेम करु । प्रबर्धन करु । युवा अवस्था एहन अवस्था छी जे लोकक भविष्य निर्धारणक आधार तय करै छै । एहि अवस्थाक सदूपयोग करु । मिथिलाक युवा युवती सभ मेहनी हए छै । प्रतिभा सम्पन्न हए छै । ई बात सारा संसार जानै छै । तेँ मैथिली आ मिथिलाक लेल महान् कार्य करि अपन प्रतिभाक देखाउ ।

    ▶ अहाँ एक युवा गजलकार छी । एहि उमेरमे बहुत प्रशंसक कमा चूकल छी । मुदा एखन धरि सिङ्गल छी । अहाँकेँ डबल भेल कहिया देख सकै छी ?
    – हा हा हा हा ....... ई प्रशन त हमरा संसारक सभसँ खतरनाक प्रशन बुझाइत अछि । एखन सोचने नै छी । सही समय एलापर डबल हेबै ।

    ▶ तपाई अपन प्रशंक सभकेँ “मैथिली सिने संसार” मार्फत की कहऽ चाहबै ?
    – सर्वप्रथम त हुनका सभकेँ हम हार्दिक धन्यवाद देब चाहब । हुनका सभक सिनेहक कारणे हम गजल रचनाक क्षेत्रमे निरन्तर आगू बढि रहल छी । खास कऽ मैथिल युवा युवती सभकेँ “मैथिली सिने संसारक” माध्यमसँ कहब चाहब जे एखन बहुत संख्यामे अहाँ सभ मैथिली गजल गजल, शेर–ओ–शायरी आ साहित्यिक क्षेत्रमे कलम चला रहल छी । ई खुशीक बात छी । मुदा अहाँ सभ कोनो क्षेत्रमे लागैसँ पहिने तैसँ सम्बन्धित विस्तृत ज्ञान हाँसिल केलाक बाद लागी । एहिसँ अहाँके यात्रा सहज भेलाक संगे अपन लक्ष्य धरि असानसँ पहुँच सकै छी । जेना साहित्य लोककेँ सभ्य बनाबै छै तहिना गजल लोककेँ गुनवाण बनाबै छै । जँ अहाँ सभमेसँ केओ मैथिली गजल क्षेत्रमे सकृयताक संग आबऽ चाहै छी त हम अपन दिससँ जे कऽ सकब से सहयोग करऽ लेल सदिखन तयार छी ।

    ▶ अपन प्रशंकहरु सभक लेल कोनो सम्पर्क नं. या
    – अवश्य । वहाँहरुले मलाई मेरो यो ई–मेल आईडी मार्फत सम्पर्क गर्न सक्नुहुन्छ E-mail : kundankumarkarna145@gmail.com

    धन्यवाद !
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  21. Valentine Special Post Cards in Maithili

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  22. Short Poem - Jawaani
    By : Kundan Kumar Karna

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  23. गजल

    Saturday, January 31, 2015

    आब सहब नै दाबन ककरो
    जोर जुलुम आ चापन ककरो

    गेल जमाना क्रूरक सभकेँ
    घर त हमर छल आसन ककरो

    भेल बहुत जे भेलै काइल
    लोक सुनै बस भाषण ककरो

    पूत मधेसक छी अभिमानी
    सहि कऽ रहब नै शोषण ककरो

    दर्द विभेदक भारी कुन्दन
    माथ हमर अछि चानन ककरो

    मात्राक्रम : 2112-222-22

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  24. हे शारदे दिअ एहन वरदान
    हो जैसँ जिनगी हमरो कल्याण

    पूजब सदति हे माए बनि पूत
    अपना शरणमे दिअ हमरा स्थान

    निष्काम हो मोनक सभ टा आश
    सुख शान्ति आ जगमे दिअ सम्मान

    जिनगी समाजक लागै शोकाज
    हमरा बना दिअ तेहन गुणवान

    लिअ प्रार्थना कुन्दनकेँ स्वीकारि
    बल वुद्धि विद्या आ दिअ ने ज्ञान

    मात्राक्रम : 2212-222-221

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  25. गजल

    Friday, January 16, 2015

    तोरा आदर कि केलियौ तूँ त हमरा सस्ता बुझि लेलही
    बस अपनाकेँ गुलाब हमरा सुखल सन पत्ता बुझि लेलही

    मोनक कुर्सी कि देलियौ बैस तोरा एके छन लेल हम
    हमरे जिनगीक तूँ अपन राजनीतिक सत्ता बुझि लेलही

    गजलक गंभीरता मधुरता असलमे तोरा की मालूम
    हमरा शाइर त बात दूरक अपन तूँ भगता बुझि लेलही

    शारीरिक हाउ भाउ तोहर बुझाइत रहलहुँ एना सदति
    जेना नेहक रहै पहिल बेर हमरे खगता बुझि लेलही

    नै छै जै मोनमे रहल चाह नेहक कोनो कुन्दन हमर
    तै मोनसँ हम किएक जोडब अधूरा नाता बुझि लेलही

    मात्राक्रम : 22221-212-2122-222-212

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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  26. गजल

    Saturday, January 3, 2015

    साँचमे शायद ओ नै चाहैत रहै
    मोन झुठ्ठे सदिखन पतिआबैत रहै

    फुलि हमर आगू ओ सुन्नर फूल जकाँ
    बाग पाछू अनकर गमकाबैत रहै

    हम हियामे बैसेलहुँ बुझि नेह अपन
    तेँ सदति हमरा ओ तड़पाबैत रहै

    साँच नेहक दुनियामे अछि मोल कहाँ
    लोक जैमे जिनगी बीताबैत रहै

    जाइ छल मन्दिर नित कुन्दन संग मुदा
    प्राथनामे दोसरकेँ माँगैत रहै

    मात्राक्रम : 212-222-2221-12

    © कुन्दन कुमार कर्ण
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